भंडारी वस्ताद नेपाळवाले

 प्रवास : पुणे ते संभाजीनगर व्हाया नगर

अरे बैठने को जगह नाही हे तो बैठेंगे नीचे !

असे म्हणून वस्ताद सीटच्या बाजूला बसले. बाजूचे सहप्रवासी त्यांना सांगत होते, "अरे भाई टिकट तो उतनाही लगेगा, उपर जाके सो जाव ना" .( बस seater आणि स्लीपर अशी दोन्ही होती) .

"मिटटी से बना आदमी हु मिटटी मे ही बैठना है तो बैठेंगे."

जरा वेळाने माझ्या बाजूचा माणूस उतरला की मी बोललो "बैठो जगाह होगयी है."

तसे वस्ताद उठले आणि बाजुला बसले. आधी जे फोन वर बॉले ते त्यांनीं रिपीट सांगितले. साब ये जामखेड से आया हुं. अभी बेटे के पास  जा रहा हुं . हॉटेल मे वस्ताद हुं 1 महिना 4 दिन हुआ . हॉटेल वाले ने पैसा नाही दिया , 600 रुपया लिया मे भाग के आया.

आम्ही दोघांनी आपापल्या स्थळाचे तिकिटे काढली आणि , पुढे वार्ता सुरू झाली .

"मैं ठहरा परदेसी आदमी साब कहा ये गुंडो के मुह लगणेका, आज एक गरीब का पैसा डुबायेगा तो कल वो खुद डुब जायेगा.क्योकी बद्दुआ पुरे family की लगेगी ना. 

अभी जहा बेटा है वहा ठीक ठाक है वहा सेठ है वो अच्छा आदमी है.उसका प्योर वेज होटल है। वहा हात का सफाई बोहोत इंपोर्टेंट है । नॉनवेज कोई कैसा भी खा लेता है । पर वेज में मे काला मसाला ठीक से बनाता हु। नही तो बाकी लोग नया मसाला और कलर भी डालते है । फिर टेस्ट कहा रहेगी।

मेरा ये हूनर है साब बडा बेटा भी सिखा है , वो खुद को संभाला है . एक बेटी है वो पुणे मे है , बहन है , भाई है ,मैं सबसे बडा हुं मेने वस्ताद गिरी करके सबको अपने अपने रस्ते को लगाया बस एक छोटा बेटा वो निकल गया लडकी को लेके .

वैसे मेरी भी लव्ह मॅरेज है मेरे 5 साले है  1 दुबई मे है, 1युके मे है 1 सुरत मे है, 1 चीन मे है और 1 अपने घर है नेपाल मे .सब के होटल है । 

उनकी बहन थी मेरी मैडम । मेरा भी ठीक ठाक है माताजी है 70 साल की पिताजी है 85 साल के बस मैडम गुजर गई जब में 30 का था वो छोटा बेटा 2 साल का था । वो 18 की उम्र में राजनीति में उतरा था । सबके लिए आदर्श बना था पर वो लड़की को लेके भाग गया । में चाहता था की जैसे मैं अपने दादा पापा का गशती का काम करते करते ये खाना बनाने का काम मैडम के साथ सीखा हु वैसे में वो इंजीनियरिंग करके उसको कोरिया भेजना था मुझे । पर वो लड़की को लेके भाग गया । बाकी सब मान भी जायेंगे पर मेरी मां नही मानेगी । वो अभी भी कास्ट की बाते करती है । हा मेरी भी लव मैरेज थी पर कास्ट एक थी । अभी उसको कोन समझाते बैठे की अभी जमाना कहा पोहोचा है और हम कहा फसे है।

वैसे वो भी हट्टी कट्टी है दो भैसे है उसके पास उसका खर्चा वो संभाल सकती है । पर मेरा बड़ा बेटा होने के नाते मैं फर्ज निभाया हु।






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डॉ. ननावरे , PHD Marathi, LLM, PHD scolar in law.

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